Saturday, 15 June 2013

नीतीश का बड़ा दांव

नीतीश ने यदि नरेन्द्र मोदी का विरोध करते हुए भाजपा से दूरी बनाई है तो इसके पीछे ठोस वजहें हैं। नीतीश को राजनीति का ग्रेट गैंबलर यूं ही नहीं कहा जाता। नीतीश ने देख लिया है कि यदि मोदी उनके करीब आते हैं तो खुद बिहार में उनके लिए विधानसभा चुनाव जीतना मुश्किल हो जाता है। 2004 के लोकसभा चुनाव में वो इसका स्वाद भी चख चुके हैं। जब गुजरात में दंगे हुए। गोधरा में ट्रेन पर हमला किया गया, उस समय अटल बिहारी सरकार में खुद नीतीश रेल मंत्री थे। इस घटना के बाद अटल बिहारी वाजपेयी ने तो अपनी पीड़ा व्यक्त की किन्तु नीतीश खामोश रहे थे। इसके बाद लोकसभा में बिहार के मुसलमानों ने उन्हें सबक सिखा दिया। यहां भाजपा-जदयू की युति को 40 में से सिर्फ 11 सीटें मिल पार्इं। नीतीश ने इससे सबक लिया और अगले साल 2005 में विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान मोदी को बिहार से दूर रखा। नतीजा फिर शीशे की तरह साफ था। नीतीश ने भारी बहुमत से यह चुनाव जीता।
ये तो हुई अल्पसंख्यक वोटों के ध्रुवीकरण की बात। बिहार में अल्पसंख्यक वोटों की संख्या 17 फीसदी है। इसमें से 80 फीसदी पिछड़े यानी कि पसमांदा मुसलमान हैं। इस वोटबैंक पर नीतीश की प्रतिस्पर्धा लालू की पार्टी राजद से है। मोदी का खुलेआम विरोध कर नीतीश ने लालू से यह बाजी संभवत: जीत ली है।
अब आती है अगड़ों की बात। बिहार में अगड़ों का प्रतिशत अल्पसंख्यकों से कुछ ज्यादा, 21 प्रतिशत है। माना जाता है कि 13 फीसदी अगड़े वोटों पर भाजपा का एकाधिकार है। जदयू के 20 सांसदों की जीत में भाजपा के अगड़े वोटों का बड़ा हाथ है। विधानसभा में भी अगड़ों का खासा प्रतिनिधित्व है और उनकी संख्या निरंतर बढ़ रही है। 2000 में जहां 56 अगड़े विधायक थे वहीं 2005 में इनकी संख्या 59 हो गई। अभी यहां की कुल 243 सीटों में से 76 पर अगड़े ही काबिज हैं। नीतीश ने भाजपा से इतर इन लोगों को साधने की शुरुआत बहुत पहले ही कर दी है। पिछले विधानसभा चुनाव के पहले नीतीश ने सवर्ण आयोग का वादा किया। चुनाव जीतते ही उन्होंने सवर्ण आयोग गठित भी कर दिया। अगड़ों को लुभाने के लिए वो बिहार के सुशासन को भी सामने रखते हैं। अपराध पर काबू पाकर उन्होंने सवर्णों में सुरक्षा का अहसास मजबूत किया है।
राजनीति के माहिर खिलाड़ी नीतीश यह भली भांति जानते हैं कि मोदी के मजबूत होने का मतलब खुद नीतीश या जदयू का कमजोर होना है। यदि मोदी पीएम बन जाते हैं तो आज नहीं तो कल बिहार में उसे नीतीश के कई विकल्प मिल जाएंगे। नीतीश को यह कदापि मंजूर नहीं। नीतीश ने 17 साल पहले यदि आडवाणी और वाजपेयी के साथ मिलकर एनडीए बनाया था तो उसकी कीमत भी रेलमंत्री बनकर वसूली थी। वे राजनीति के कच्चे खिलाड़ी नहीं हैं। जो भाजपा के पावर को बहुत बढ़ा चढ़ाकर पेश कर रहे हैं वे बस यहीं गच्चा खा जाते हैं। मोदी के लिए यूपी की डगर कभी आसान नहीं रही। बिहार में भी नीतीश ‘मोदी नहीं तो मोदी से कमतर भी नहीं’ की पोजीशन बना चुके हैं। इन दोनों राज्यों को हाशिए पर डालकर यदि भाजपा केन्द्रीय सियासत के बारे में सोच रही है तो नेता प्रतिपक्ष की सीट उसे खाली मिल सकती है। दरअसल नीतीश ने मोदी पर ही दांव खेला है। यदि गठजोड़ तोड़ने  का उन्हें कुछ नुकसान भी हुआ तो यह धर्मनिरपेक्ष बने रहने की कीमत समझी जाएगी जबकि यदि मोदी हार गए तो अकेले उनका ही नहीं खुद भाजपा का चैप्टर खतरे में पड़ जाएगा।

Wednesday, 5 June 2013

बेहतर शिक्षा के लिए एमआईटी से साझेदारी करेगा आंध्रप्रदेश

आंध्रप्रदेश में हैं 700 इंजीनियरिंग कालेज

न्यूयॉर्क। आंध्र प्रदेश अपनी शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रतिष्ठित मेसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट आफ टेक्नोलॉजी (एमआईटी) के संसाधनों का लाभ उठाना चाहता है। इसके लिए आंध्र प्रदेश एमआईटी के साथ सहमति पत्र पर हस्ताक्षर करने वाला है।
राज्य के सूचना तकनीक और संचार मंत्री पोन्नला लक्षमैया ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच सहमति पत्र पर कुछ ही महीनों में हस्ताक्षर किए जाएंगे। अभी इसके ब्योरे पर काम किया जा रहा है।
लक्षमैया ने कहा कि इस सहमति पत्र के जरिए बोस्टन स्थित इस प्रतिष्ठित संस्थान के एडएक्स प्लेटफॉर्म और ओपन कोर्सवेयर का लाभ लिया जा सकेगा। पेशेवर अध्यापकों की भारी कमी के बीच यह सीखने की वैकल्पिक प्रक्रियाएं विकसित करने में मददगार होगा।
इस साझेदारी के जरिए आंध्र प्रदेश के छोटे और ग्रामीण कॉलेज एमआईटी की आईलैब तकनीक के माध्यम से इसकी महंगी प्रयोगशालाओं तक अपनी पहुंच बना सकेंगे। इस साझेदारी के जरिए ओपन सॉफ्टवेयर इंटरफेस डेफिनेशन का भी इस्तेमाल हो सकेगा।
लक्षमैया ने कहा, एमआईटी को यह जानकर सुखद आश्चर्य हुआ कि आंध्रप्रदेश में लगभग 700 इंजीनियरिंग कॉलेज हैं और उसने कौशल विकास में सहयोग देने का वादा किया है।     उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर उद्योग का वैश्विक क्षमता वर्ष 2020 तक लगभग 24 खरब डॉलर हो जाने का अनुमान है और भारतीय बाजार की वर्तमान 45 अरब डॉलर की मांग के वर्ष 2020 तक 400 अरब डॉलर हो जाने की संभावना है। मंत्री ने कहा कि इस बाजार के विस्तार के लिए भारत के पहले इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण क्लस्टर की स्थापना हैदराबाद में की जाएगी।

गौर भारतीय यूथ बॉस्कक्टबाल टीम के प्रशिक्षक बने

एशियन यूथ क्वालीफाइंग स्पर्धा
राजनांदगॉव जिले का मिथुन दास भारतीय प्रशिक्षण शिविर में शामिल

भिलाई। ढाका (बंगलादेश) में 2 से 5 जुलाई 2013 के बीच आयोजित मिडिल एशिया जोन क्वालिफाइंग बॉस्केटबाल स्पर्धा में भारतीय यूथ टीम भाग लेगी। स्पर्धा में भाग लेने के पूर्व भारतीय बॉस्केटबाल संघ द्वारा भारतीय यूथ के संभावित 25 खिलाड़ियों का प्रशिक्षण शिविर दिल्ली के इंदिरा गांधी इण्डोर स्टेडियम में दिनांक 07/06/2013 से 30/06/2013 तक लगाया जा रहा है। भारतीय यूथ बॉस्केटबाल टीम का प्रशिक्षक छत्तीसगढ़ एवं भिलाई इस्पात संयंत्र के एनआईएस कोच एवं पूर्व राष्ट्रीय बास्केटबाल खिलाड़ी आरएस गौर को बनाया गया है।  भारतीय यूथ बॉस्केटबाल प्रशिक्षण शिविर में छत्तीसगढ़ के राजनांदगॉव जिले के मिथुन दास का चयन किया गया है।
सोनमणि बोरा (चेयरमेन - छग बॉस्केटबाल संघ), राजीव जैन (अध्यक्ष - छग बॉस्केटबाल संघ), नरेश डाकलिया (कार्यकारी अध्यक्ष - छग बॉस्कक्टबाल संघ) एवं राजेश पटेल (महासचिव - छग बॉस्केटबाल संघ) ने संयुक्त रूप से बताया कि आरएस गौर ने छग की सब-जूनियर, यूथ एवं जूनियर टीमों को कई राष्ट्रीय स्पर्धा में पदक दिलवाने में अहम भूमिका अदा की है। उन्होंने अभी तक 9 अन्तर्राष्ट्रीय खिलाड़ी तैयार किये हैं। गौर भिलाई इस्पात संयंत्र के कोक-ओवन विभाग में वरिष्ठ तक्नीशियन के पद पर कार्यरत हंै।
वहीं मिथुन दास साई हास्टल, राजनांदगॉव में निरन्तर रूप से अभ्यास करता है।  मिथुन इसके पूर्व भी भारतीय सब-जूनियर एवं यूथ बॉस्केटबाल प्रशिक्षण शिविर में भाग लिया है।  मिथुन के प्रशिक्षक के राजेश्वर राव (साई प्रशिक्षक) हैं।
ढाका में आयोजित मिडिल एशिया जोन यूथ बॉस्केटबाल स्पर्धा में भारत, कजाकिस्तान, अफगानिस्तान, बंगला देश, नेपाल, भूटान, पाकिस्तान, आदि टीमों के भाग लेने की संभावना है। इसमें से प्रथम दो टीमें अगस्त 2013 में तेहरान (इरान) में आयोजित चौथी एशियन यूथ
बॉस्केटबाल स्पर्धा में भाग लेंगी।

फीबा एशियन 3x3 में भारतीय जूनियर टीम ने जीता रजत

किसी भी भारतीय जूनियर टीम की पहली उपलब्धि
सबसे लंबी खिलाड़ी पूनम चतुर्वेदी ने बनाए सर्वाधिक अंक
टीम की तीन में से दो खिलाड़ी भिलाई के
कोच राजेश पटेल ने दिया भारतीय बास्केटबाल संघ को श्रेय

हाल ही में बैंकाक (थाईलेंड) में खेली गई प्रथम फीबा (FIBA) एशियन जूनियर 3x3 बॉस्केटबाल प्रतियोगिता में भारतीय जूनियर बालिका एवं बालक ने बहुत ही शानदार खेल का प्रदर्शन कर पहली बार बॉस्केटबाल के इतिहास में किसी भी जूनियर एशियन बॉस्केटबाल प्रतियोगिता में फाईनल खेलकर दोनों वर्गों में रजत पदक प्राप्त किया है।
बालिका वर्ग में भारतीय टीम फाईनल मुकाबले में चाईनीस थाईपाई टीम से 21-15 एवं भारतीय बालक टीम फिलिपाईन्स से 21-18 अंको से परास्त हुई थी।
भारतीय बालिका टीम की ओर से पूनम चतुर्वेदी ने 8 अंक, शरणजीत कौर ने 5 अंक तथा ईश्वरी ने 2 अंक बनाए।  भारतीय जूनियर महिला टीम ने सेमीफाईनल में मेजबान  थाईलेंड को कड़े संघर्ष के बाद 21-18 अंकों से क्वार्टर फाईनल में इन्डोनेशिया को 21-13 अंकों से तथा पूल के मैचों में कतर को 21-3 अंकों से, थाईलेंड को 21-15 अंकों से तथा लेबनान को 21-13 अंकों से परास्त किया था।
भारतीय जूनियर बालिका टीम के मुख्य प्रशिक्षक एवं भिलाई इस्पात संयंत्र के अन्तर्राष्ट्रीय प्रशिक्षक विक्रम पुरस्कार, विश्वामित्र पुरस्कार, वीर हनुमान सिंह पुरस्कार प्राप्त राजेश पटेल ने बताया की उन्हें बेहद खुशी है कि भारतीय जूनियर बालिका एवं बालक टीम ने पहली बार एशिया में कोई जूनियर अन्तर्राष्ट्रीय स्पर्धा जीती है।  इसका प्रमुख श्रेय भारतीय बॉस्केटबाल संघ द्वारा पिछले 12 वर्षों से विभिन्न वर्गों में लगातार प्रशिक्षण शिविर एवं अधिक से अधिक भारतीय टीमों के अन्तर्राष्ट्रीय स्पर्धा में भेजने को जाता है। उन्होंने बताया की भारतीय 4 सदस्यीय जूनियर महिला टीमें 2 बालिकाएं छत्तीसगढ़ एवं भिलाई इस्पात संयंत्र की पूनम चतुर्वेदी (कप्तान भारतीय टीम) एवं शरणजीत कौर शामिल थी।
पूनम चतुर्वेदी पूरी स्पर्धा में सबसे लम्बी खिलाड़ी 206 से.मी. (6 फीट 10 इंच) थी।  पूनम ने पूरी एशियन स्पर्धा में सभी 6 मैच खेलकर स्पर्धा में सर्वाधिक 65 अंक बनाए।
(कतर के विरुद्ध - 14 अंक, थाईलेन्ड के विरुद्ध - 10 अंक, लेबनान के विरुद्ध - 14 अंक, इण्डोनेशिया के विरुद्ध 9 अंक, थाईलेंड के विरुद्ध 11 अंक तथा चाईनीस थाईपाई के विरुद्ध 8 अंक बनाए)
शरणजीत कौर ने पूरी स्पर्धा में 6 मैच खेल कर 41 अंक बनाये (कतर के विरुद्ध -05 अंक, थाईलेंड-बी के विरुद्ध 9 अंक, लेबनान के विरुद्ध - 05 अंक, इण्डोनेशिया के विरुद्ध - 11 अंक, थाईलेंड के विरुद्ध 07 अंक तथा चाईनीस थाईपाई के विरुद्ध - 5 अंक बनाए)। 

मदर चिल्ड्रन अस्पताल को मिली जमीन

बिलासपुर। शहर में 100 बिस्तर वाले मदर चिल्ड्रन अस्पताल को भारत सरकार से पहले ही मंजूरी मिल गई थी। शहर के बीच जमीन की कमी को लेकर मामला अधर में था। इसी बीच नया बस स्टैण्ड बनने से पुराने बस स्टैण्ड की जमीन खाली हो गई। शहर के बीच जमीन होने के कारण प्रयास किया जा रहा था कि इसी जमीन पर मदर चिल्ड्रन अस्पताल का निर्माण कराया जाए। शासन ने इस जमीन पर अपनी स्वीकृति देते हुए राजस्व विभाग को 3 एकड़ 3 डिसमिल जमीन का सीमांकन करने का आदेश दिया है।
प्रसव के बाद मां व बच्चा रहेंगे साथ
शहर के बीच 15 करोड़ से बनने वाले इस 100 बिस्तर वाले अस्पताल को अत्याधुनिक तरीके से बनाया जाएगा। इस अस्पताल में सभी वार्ड वातानुकूलित रहेंगे। सबसे अच्छी बात है कि अन्य अस्पताल की तरह यहां प्रसव के बाद मां व बच्चे को अलग नहीं रखा जाएगा बल्कि मां व बच्चा अगल बगल ही साथ में रहेंगे।

फीस वृद्धि पर हंगामा

रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की मान्यता समिति और वित्त एवं कायर्पालिका समिति की बैठक दो अलग-अलग पालियों में आयोजित की गई, जिसमें नए स्कूलों को मान्यता देने के संबंध में फैसला किया जाना था। वहीं वित्त एवं कायर्पालिका समिति की बैठक हंगामेदार तरीके से शुरू हुई, जहां सदस्यों ने फीस बढाने के निर्णय पर गहरी आपत्ति जताई।
सदस्य तब भड़क गए, जब उन्हें बताया गया कि डीएड की नियमित रूप से ली जाने वाली परीक्षा के फीस में वृध्दि का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय परीक्षा समिति द्वारा लिया गया है, जिसे अब वित्त एवं कार्यपालिका समिति भी अपनी मंजूरी दे दे। जिस पर मंडल सदस्यों ने आपत्ति करते हुए कहा कि फीस वृध्दि का निर्णय लेने का अधिकार वित्त एवं कार्यपालिका समिति का है। सदस्यों ने मंडल अध्यक्ष से कहा कि यह दो समितियों को लड़ाने का कार्य है, यदि अब वे फीस वृध्दि के निर्णय को टाल दें तो परीक्षा समिति का अपमान होगा। सदस्यों ने मंडल अध्यक्ष टी राधाकृष्णन से दो टूक कहा कि यदि दुबारा ऐसी स्थिति आई तो वे अपने विवेक से निर्णय लेने के लिए सक्षम हैं। उसके बाद वित्त एवं कायर्पालिका समिति ने डीएड के नियमित पाठयक्रम में फीस वृध्दि को मंजूरी दे दी।
डीएड के दूरस्थ पाठयक्रम के लिए फीस 2850 रु. तय की गई है, यह फीस दो वर्षों के लिए होगी। परीक्षार्थियों को छह अवसर प्रदान किए जाएंगे।

स्मार्टकार्ड धारक के इलाज से इंकार

रायपुर। राजधानी के अस्पताल संचालकों ने स्मार्ट काडर्धारी विकलांग युवक का इलाज करने से इंकार कर दिया, जिसके कारण वह दिन भर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकता रहा। महासमुंद के बरनाईदादर गांव से आए युवक धनीराम नवरत्न ने कलेक्टर से शिकायत की कि उसे दिल की बीमारी तथा ब्लडप्रेशर की शिकायत है, जिसके इलाज के लिए वह राजधानी आया था, परंतु बांठिया अस्पताल, श्रीराम हास्पिटल एवं रामकृष्ण केयर अस्पताल के डॉक्टरों ने उसका इलाज स्मार्ट कार्ड से करने से इंकार कर दिया है। कलेक्टर ने तत्काल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को युवक के इलाज में सहायता करने के निर्देश दिये।  युवक का उपचार करा दिया गया है। अभी उसकी हालत ठीक है।

संविदा की नौकरी गई, हालत खराब

कोरबा। राज्य  के जनशक्ति नियोजन विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न शासकीय आईटीआई में कार्यरत लगभग 500 संविदा प्रशिक्षण अधिकारियों में से 286 की सेवा समाप्त कर दी गई है। इनके पास 5 माह से आय का साधन नहीं होने के कारण परिवार आर्थिक और मानसिक परेशानी के दौर से गुजर रहा है। निराश जिले के 22 कर्मियों ने सपरिवार इच्छा मृत्यु की मांग सरकार से की है।
विभिन्न शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में कार्यरत लगभग 500 संविदा प्रशिक्षण अधिकारियों में से माह जनवरी में 156 अधिकारियों की संविदा अवधि समाप्त हुई। इन्होंने संविदा अवधि बढ़ाने हेतु मुख्यमंत्री, विभागीय मंत्री, विभागीय सचिव जनशक्ति नियोजन विभाग, संचालक रोजगार एवं प्रशिक्षण, महामहिम रायपाल को ज्ञापन सौंपकर संविदा अवधि बढ़ाने की गुहार लगाई किन्तु आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। इसी तरह मई में दूसरे बैच के 130 संविदा प्रशिक्षण अधिकारियों की सेवा समाप्त कर दी गई जिससे अब तक कुल 286 अधिकारी बेरोजगार हो चुके हैं। इन संविदा अधिकारियों ने परिवार सहित जिनमें मां, पत्नी, बच्चे शामिल हैं, कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपर कलेक्टर रवि प्रकाश गुप्ता के समक्ष राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर सपरिवार इच्छामृत्यु हेतु अनुमति चाही।

Sunday, 2 June 2013

इग्नू का दूरस्थ शिक्षा परिषद भंग

अस्थायी तौर पर लगी रोक, अधिसूचना जारी
अगली व्यवस्था तक यूजीसी करेगी नियमन
नई दिल्ली। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय मुक्त विश्वविद्यालय (इग्नू) के दूरस्थ शिक्षा परिषद (डीईसी) को सरकार ने भंग कर दिया है और विश्वविद्यालय से मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षण प्रणाली (ओडीएल) के तहत अगले आदेश तक किसी नए केंद्र को मंजूरी नहीं देने को कहा है। अगली व्यवस्था तक यूजीसी करेगी नियमन।
इग्नू के कुलपति प्रो एम असलम ने कहा, सरकार ने इस आशय की व्यवस्था की है और इग्नू ने इसे अधिसूचित कर दिया है। उन्होंने कहा कि यह अस्थाई व्यवस्था है जो प्रो माधव मेनन समिति की सिफारिशों के आधार पर की गई है।
प्रो. असलम ने कहा, माधव मेनन समिति ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि विश्वविद्यालय को स्वयं नियामक निकाय नहीं बनना चाहिए. डीईसी नियामक निकाय है। इसलिए उसे स्वायत्त निकाय का स्थान प्रदान किया जा रहा है। इग्नू के कुलपति ने कहा, नई व्यवस्था (डीईसी को भंग करने) से इग्नू पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा और दूरस्थ शिक्षा प्रदान करने वाले शीर्ष विश्वविद्यालय के रूप में इग्नू बना रहेगा।
बहरहाल, विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के एक अधिकारी ने कहा कि अगली व्यवस्था तक यूजीसी दूरस्थ शिक्षा कार्यक्रमों का नियमन करेगी। यूजीसी मुक्त एवं दूरस्थ शिक्षा प्रणाली (ओडीएल) कोर्स और पाठ्यक्रमों के मानक को उच्च कोटि का बनाए रखने के लिए उपयुक्त नियमन तैयार करने पर काम कर रही है।

जजों की नियुक्ति में सरकार कैसे न बोले

नई दिल्ली। कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने रविवार को कहा कि उच्च अदालतों में जजों की नियुक्ति में सरकार की भूमिका होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि उच्च अदालतों में जजों की नियुक्ति के लिए कोलेजियम प्रणाली अपनाई जाती रही है किन्तु यह सरकार की कसौटी पर खरी नहीं उतरी है।
सिब्बल ने कहा कि ऊपरी अदालतों में जजों की नियुक्ति के लिए अपनाई जाने वाली दो दशक पुरानी कोलेजियम प्रणाली का पटाक्षेप करने वे जल्द ही मंत्रिमण्डल में प्रस्ताव रखने जा रहे हैं। इसका स्थान न्यायिक नियुक्ति आयोग लेगा। आयोग उच्च एवं सर्वोच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति के संबंध में अपनी राय देगा।
सिब्बल ने कहा, ‘कोलेजियम प्रणाली हमारी अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी। मुझे लगता है कि यह खुद न्यायिक व्यवस्था की अपेक्षाओं पर भी खरी नहीं उतरी। मुझे लगता है कि जजों की नियुक्ति में लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए पूरी पारदर्शिता के साथ सबसे अच्छे उम्मीदवारों को लिया जाना चाहिए। इसके लिए विस्तृत विचार विमर्श का रास्ता भी खुला रहना चाहिए।’
हाल ही में कानून मंत्रालय संभालने वाले सिब्बल ने कहा, ‘सर्वोच्च न्यायालयों एवं देश के 24 उच्च न्यायालयों में न्यायिक अधिकारियों की नियुक्तियां में जितनी भूमिका जजों की होती है उतनी ही सरकार की भी होनी चाहिए।’
गौरतलब है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर ने दृढ़ता पूर्वक कोलेजियम प्रणाली का समर्थन किया था। उनका कहना था कि न्यायपालिका के उच्च पदों पर नियुक्ति बेहद सावधानी के साथ किया जाता है।

मंत्रियों के फर्जी लेटरहेड से कन्फर्म हो रही टिकटें

नई दिल्ली। सीजन में रिजर्वेशन के लिए मारामारी के बीच दिल्ली पुलिस के पास एक अनोखा मामला आया है। इसके अनुसार वेटिंग तथा आरएसी रेल टिकटों को कन्फर्म कराने के लिए दलाल तीन केन्द्रीय मंत्रियों के लेटरहेड फर्जी लेटरहेड का इस्तेमाल करते थे।
दिल्ली पुलिस ने बताया कि उत्तर रेलवे की सतर्कता शाखा की शिकायत पर धोखाधड़ी और फर्जीवाड़ा का मामला दर्ज किया गया है। इस संबंध में रेलवे के मंडल वाणिज्य प्रबंधक, लखनऊ की ओर से सुराग मिला था। शिकायत के अनुसार ट्रैवल एजेंटों के एक ग्रुप ने वेटिंग रेल टिकटों को कन्फर्म कराने के लिए केंद्रीय मंत्रियों एस जयपाल रेड्डी, आनंद शर्मा और के सी वेणुगोपाल के फर्जी लेटरहेड का इस्तेमाल किया।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि उत्तर रेलवे ने इस तरह के सात मामलों की ओर ध्यान आकर्षित किया है, जिसमें से पांच में फर्जीवाड़ा किया गया था। इन सात मामलों में से तीन में फर्जी पत्र रेड्डी, शर्मा और वेणुगोपाल के नाम से और दो में बीएसपी सांसद अंबेद राजन के नाम से लिखे गए। सांसद रमाकांत यादव और जगदानंद के नाम से आए पत्र असली पाए गए।
अधिकारी ने बताया कि जिन लेटरहेड पर लिखकर ये पत्र भेजे गए, न सिर्फ वे फर्जी थे बल्कि इस पर मंत्री के कार्यालय के पते के स्थान पर शास्त्री भवन लिखा था जबकि उनका कार्यालय अनुसंधान भवन में है।
रेलवे सतर्कता शाखा द्वारा की गई जांच में पाया गया कि रेड्डी कभी इस तरह के पत्र पर अपने हस्ताक्षर नहीं करते और सिर्फ उनके निजी सचिव अथवा अतिरिक्त निजी सचिव ही ऐसा करते हैं। शर्मा के निजी स्टाफ ने भी शाखा को बताया कि शर्मा आपात कोटा वाले पत्रों पर हस्ताक्षर नहीं करते। मंत्री के सहायक ने सतर्कता शाखा को बताया कि मंत्री कभी भी किसी पत्र में दाहिनी तरफ हस्ताक्षर नहीं करते, वे हमेशा बाईं तरफ हस्ताक्षर करते हैं।

गैंगरेप का झूठा आरोप लगाकर फंसी लड़की

नई दिल्ली। दो युवकों पर गैंग रेप का झूठा आरोप लगाना 20 साल की एक लड़की को महंगा पड़ गया। अदालत ने यह कहते हुए आरोपियों को बरी कर दिया कि पुलिस अब लड़कियों के इशारों पर नाचने लगी है। कोर्ट ने झूठे आरोप लगाने वाली लड़की के खिलाफ मामला चलाने का आदेश भी दिया।
अदालत ने कहा कि वह आरोपियों की खोई हुई इज्जत बहाल नहीं कर सकती। साथ ही कोर्ट ने रेखांकित किया, 'यह बहुत अफसोसनाक है कि इधर एक रुझान चल निकला है जिसमें जांच अधिकारी अपने फर्ज और जिम्मेदारियों को पूरी तरह धता बताते हुए बलात्कार की शिकायत करने वाली लड़की के इशारे पर नाचते हैं।'
अडिशनल सेशन जज वीरेन्दर भट ने कहा, 'यह उपयुक्त मामला है जहां भारतीय दंड संहिता की धारा 193, 196 (किसी न्यायिक कार्यवाही में झूठा बयान देना) के तहत दंडनीय अपराध करने के लिए आरोप लगाने वाली लड़की के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए।
अदालत ने आदेश दिया कि उसके फैसले की प्रतियां दिल्ली पुलिस कमिश्नर और अन्य को भेजी जाए ताकि लड़की के बयान को अकाट्य सत्य करार दिए बगैर खुले दिमाग से ऐसे मामलों की जांच करने के लिए पुलिस अधिकारियों को संवेदनशील बनाने और प्रशिक्षित करने की दिशा में प्रयास किए जाएं।

Saturday, 1 June 2013

शिक्षा में Quantity नहीं Quality की चिंता करें

लातूर। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि हमें शिक्षा में क्वांटिटी नहीं बल्कि क्वालिटी की चिंता करनी चाहिए। शिक्षा में यदि भारतीय जीवन मूल्यों की सुरक्षा हुई होती तो आज महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए कठोर कानून बनाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
राष्ट्रपति ने यहां दयानंद शिक्षा समाज की स्वर्ण जयंती के समापन समारोह में कहा कि अब लोग फिर से इस बारे में बातें कर रहे हैं। अगर हमने अपनी सभ्यता की संपत्ति ‘महिलाओं के लिए सम्मान, बच्चों की देखभाल, बुजुर्गों के लिए सम्मान और सर्वसमाज के लिए सहिष्णुता’ नहीं भूले होते तो ये कभी नहीं होती। ये मूल्य हमारी प्राचीन सभ्यता से आते हैं। ये मूल हैं जिन्हें युवा छात्रों के मन में शुरू से पैदा करने की जरूरत है। अगर हमारे पास मूल्य होंगे तो हमें इन सामाजिक बुराइयों से निबटने के लिए कठोर या कठोरतम कानून के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
राष्ट्रपति ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए देश की शिक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण सुधार करने की जरूरत पर बल दिया। मैंने इससे पहले भी अपनी निराशा साझा की है-विश्व के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में केवल एक भारतीय विश्वविद्यालय है। राष्ट्रपति ने कहा कि देश में डिग्री देने वाले 650 से अधिक संस्थान और 33 हजार से अधिक कालेज हैं लेकिन हमारे यहां अच्छे गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक संस्थानों की कमी है जिसके कारण कई अच्छे छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना पसंद करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में प्राचीन समय में नालंदा और तक्षशिला जैसे कई प्रसिद्ध विश्वविद्यालय थे। मेरा विश्वास है कि अगर हम प्रयास करेंगे, हम उन सुनहरे दिनों में वापस जा सकते हैं। मुखर्जी ने निजी क्षेत्र से शिक्षा क्षेत्र की बेहतरी और नूतनता के लिए निवेश करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा क्षेत्र में बड़ा निवेश कर रही है। सरकार ने 12वीं पंचवर्षीय योजना में शिक्षा के विस्तार के लिए जीडीपी का छह प्रतिशत निर्धारित किया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र में काफी विस्तार हुआ है। इस क्षेत्र में नामांकित कुल छात्रों की संख्या 11वीं योजना की समाप्ति के समय 2.6 करोड़ थी जो 12वीं योजना में बढ़ने की संभावना है।
मुखर्जी ने कहा कि भारत को अच्छी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच प्रदान करने और इसे वहन योग्य बनाने के लिए मेहनत करने की जरूरत है। महाराष्ट्र के दो दिवसीय दौरे पर आए और कल मुंबई तथा पुणे का दौरा करने वाले मुखर्जी लातूर पहुंचे जो राज्य में शिक्षा के महत्वपूर्ण केन्द्र के तौर पर उभरा है। वर्ष 1962 में स्थापित दयानंद सोसायटी के शिक्षण संस्थानों में करीब 10 हजार छात्र पढ़ते हैं।

लोगों को मेरी आवाज पसंद नहीं :शान

मुंबई। बॉलीवुड की फिल्मों में कई बेहतरीन गानों के लिए अपनी आवाज देने वाले गायक शान का कहना है कि अब निर्माता और संगीतकार उनकी आवाज को अपनी फिल्मों में जगह नहीं देना चाहते।
शान ने अपनी सुरीली आवाज से ‘दिल चाहता है’ में ‘कोई कहे कहता रहे’, ‘फना’ में ‘चांद सिफारिश’, ‘सांवरिया’ में ‘जब से तेरे नैना’ और ‘थ्री इडियट्स’ में ‘बहती हवा सा’ जैसे गीतों की सफलता में अहम भूमिका निभाई थी लेकिन अब हिंदी फिल्मों में उनके गीतों की संख्या कम होती जा रही है।
शान ने कहा, यह प्रस्ताव पर निर्भर करता है। ऐसा नहीं है कि मैं गीत नहीं चुन रहा या मैंने अपना बजट बढा दिया है। यदि लोग मुझे प्रस्ताव ही नहीं दे रहे तो क्या किया जा सकता है। शायद श्रोताओं को अब भी मेरी आवाज पसंद हो लेकिन निर्माता, अभिनेता या संगीत निर्देशक अब इसे पसंद नहीं करते। मेरी आवाज शायद आजकल के गीतों के अनुकूल नहीं है।
41 वर्षीय अभिनेता ने कहा, सच्चाई यह है कि एक गायक के तौर पर आज भी मुझमें काफी प्रतिभा है। गीतों के लिए आजकल जिस तरह के गायकों का चुनाव किया जा रहा है, उससे गीत की उम्र कम हो जाती है। शान ‘झलक दिखला जा’ में अपनी नृत्य प्रतिभा दिखाते नजर आएंगे।