Wednesday, 5 June 2013

मदर चिल्ड्रन अस्पताल को मिली जमीन

बिलासपुर। शहर में 100 बिस्तर वाले मदर चिल्ड्रन अस्पताल को भारत सरकार से पहले ही मंजूरी मिल गई थी। शहर के बीच जमीन की कमी को लेकर मामला अधर में था। इसी बीच नया बस स्टैण्ड बनने से पुराने बस स्टैण्ड की जमीन खाली हो गई। शहर के बीच जमीन होने के कारण प्रयास किया जा रहा था कि इसी जमीन पर मदर चिल्ड्रन अस्पताल का निर्माण कराया जाए। शासन ने इस जमीन पर अपनी स्वीकृति देते हुए राजस्व विभाग को 3 एकड़ 3 डिसमिल जमीन का सीमांकन करने का आदेश दिया है।
प्रसव के बाद मां व बच्चा रहेंगे साथ
शहर के बीच 15 करोड़ से बनने वाले इस 100 बिस्तर वाले अस्पताल को अत्याधुनिक तरीके से बनाया जाएगा। इस अस्पताल में सभी वार्ड वातानुकूलित रहेंगे। सबसे अच्छी बात है कि अन्य अस्पताल की तरह यहां प्रसव के बाद मां व बच्चे को अलग नहीं रखा जाएगा बल्कि मां व बच्चा अगल बगल ही साथ में रहेंगे।

फीस वृद्धि पर हंगामा

रायपुर। छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल की मान्यता समिति और वित्त एवं कायर्पालिका समिति की बैठक दो अलग-अलग पालियों में आयोजित की गई, जिसमें नए स्कूलों को मान्यता देने के संबंध में फैसला किया जाना था। वहीं वित्त एवं कायर्पालिका समिति की बैठक हंगामेदार तरीके से शुरू हुई, जहां सदस्यों ने फीस बढाने के निर्णय पर गहरी आपत्ति जताई।
सदस्य तब भड़क गए, जब उन्हें बताया गया कि डीएड की नियमित रूप से ली जाने वाली परीक्षा के फीस में वृध्दि का निर्णय लिया गया है। यह निर्णय परीक्षा समिति द्वारा लिया गया है, जिसे अब वित्त एवं कार्यपालिका समिति भी अपनी मंजूरी दे दे। जिस पर मंडल सदस्यों ने आपत्ति करते हुए कहा कि फीस वृध्दि का निर्णय लेने का अधिकार वित्त एवं कार्यपालिका समिति का है। सदस्यों ने मंडल अध्यक्ष से कहा कि यह दो समितियों को लड़ाने का कार्य है, यदि अब वे फीस वृध्दि के निर्णय को टाल दें तो परीक्षा समिति का अपमान होगा। सदस्यों ने मंडल अध्यक्ष टी राधाकृष्णन से दो टूक कहा कि यदि दुबारा ऐसी स्थिति आई तो वे अपने विवेक से निर्णय लेने के लिए सक्षम हैं। उसके बाद वित्त एवं कायर्पालिका समिति ने डीएड के नियमित पाठयक्रम में फीस वृध्दि को मंजूरी दे दी।
डीएड के दूरस्थ पाठयक्रम के लिए फीस 2850 रु. तय की गई है, यह फीस दो वर्षों के लिए होगी। परीक्षार्थियों को छह अवसर प्रदान किए जाएंगे।

स्मार्टकार्ड धारक के इलाज से इंकार

रायपुर। राजधानी के अस्पताल संचालकों ने स्मार्ट काडर्धारी विकलांग युवक का इलाज करने से इंकार कर दिया, जिसके कारण वह दिन भर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकता रहा। महासमुंद के बरनाईदादर गांव से आए युवक धनीराम नवरत्न ने कलेक्टर से शिकायत की कि उसे दिल की बीमारी तथा ब्लडप्रेशर की शिकायत है, जिसके इलाज के लिए वह राजधानी आया था, परंतु बांठिया अस्पताल, श्रीराम हास्पिटल एवं रामकृष्ण केयर अस्पताल के डॉक्टरों ने उसका इलाज स्मार्ट कार्ड से करने से इंकार कर दिया है। कलेक्टर ने तत्काल मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को युवक के इलाज में सहायता करने के निर्देश दिये।  युवक का उपचार करा दिया गया है। अभी उसकी हालत ठीक है।

संविदा की नौकरी गई, हालत खराब

कोरबा। राज्य  के जनशक्ति नियोजन विभाग के अंतर्गत संचालित विभिन्न शासकीय आईटीआई में कार्यरत लगभग 500 संविदा प्रशिक्षण अधिकारियों में से 286 की सेवा समाप्त कर दी गई है। इनके पास 5 माह से आय का साधन नहीं होने के कारण परिवार आर्थिक और मानसिक परेशानी के दौर से गुजर रहा है। निराश जिले के 22 कर्मियों ने सपरिवार इच्छा मृत्यु की मांग सरकार से की है।
विभिन्न शासकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान में कार्यरत लगभग 500 संविदा प्रशिक्षण अधिकारियों में से माह जनवरी में 156 अधिकारियों की संविदा अवधि समाप्त हुई। इन्होंने संविदा अवधि बढ़ाने हेतु मुख्यमंत्री, विभागीय मंत्री, विभागीय सचिव जनशक्ति नियोजन विभाग, संचालक रोजगार एवं प्रशिक्षण, महामहिम रायपाल को ज्ञापन सौंपकर संविदा अवधि बढ़ाने की गुहार लगाई किन्तु आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। इसी तरह मई में दूसरे बैच के 130 संविदा प्रशिक्षण अधिकारियों की सेवा समाप्त कर दी गई जिससे अब तक कुल 286 अधिकारी बेरोजगार हो चुके हैं। इन संविदा अधिकारियों ने परिवार सहित जिनमें मां, पत्नी, बच्चे शामिल हैं, कलेक्ट्रेट पहुंचकर अपर कलेक्टर रवि प्रकाश गुप्ता के समक्ष राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर सपरिवार इच्छामृत्यु हेतु अनुमति चाही।

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