Sunday, 2 June 2013

जजों की नियुक्ति में सरकार कैसे न बोले

नई दिल्ली। कानून मंत्री कपिल सिब्बल ने रविवार को कहा कि उच्च अदालतों में जजों की नियुक्ति में सरकार की भूमिका होना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि उच्च अदालतों में जजों की नियुक्ति के लिए कोलेजियम प्रणाली अपनाई जाती रही है किन्तु यह सरकार की कसौटी पर खरी नहीं उतरी है।
सिब्बल ने कहा कि ऊपरी अदालतों में जजों की नियुक्ति के लिए अपनाई जाने वाली दो दशक पुरानी कोलेजियम प्रणाली का पटाक्षेप करने वे जल्द ही मंत्रिमण्डल में प्रस्ताव रखने जा रहे हैं। इसका स्थान न्यायिक नियुक्ति आयोग लेगा। आयोग उच्च एवं सर्वोच्च न्यायालयों में जजों की नियुक्ति के संबंध में अपनी राय देगा।
सिब्बल ने कहा, ‘कोलेजियम प्रणाली हमारी अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतरी। मुझे लगता है कि यह खुद न्यायिक व्यवस्था की अपेक्षाओं पर भी खरी नहीं उतरी। मुझे लगता है कि जजों की नियुक्ति में लक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए पूरी पारदर्शिता के साथ सबसे अच्छे उम्मीदवारों को लिया जाना चाहिए। इसके लिए विस्तृत विचार विमर्श का रास्ता भी खुला रहना चाहिए।’
हाल ही में कानून मंत्रालय संभालने वाले सिब्बल ने कहा, ‘सर्वोच्च न्यायालयों एवं देश के 24 उच्च न्यायालयों में न्यायिक अधिकारियों की नियुक्तियां में जितनी भूमिका जजों की होती है उतनी ही सरकार की भी होनी चाहिए।’
गौरतलब है कि भारत के मुख्य न्यायाधीश अल्तमस कबीर ने दृढ़ता पूर्वक कोलेजियम प्रणाली का समर्थन किया था। उनका कहना था कि न्यायपालिका के उच्च पदों पर नियुक्ति बेहद सावधानी के साथ किया जाता है।

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