नई दिल्ली। दो युवकों पर गैंग रेप का झूठा आरोप लगाना 20 साल की एक लड़की को महंगा पड़ गया। अदालत ने यह कहते हुए आरोपियों को बरी कर दिया कि पुलिस अब लड़कियों के इशारों पर नाचने लगी है। कोर्ट ने झूठे आरोप लगाने वाली लड़की के खिलाफ मामला चलाने का आदेश भी दिया।
अदालत ने कहा कि वह आरोपियों की खोई हुई इज्जत बहाल नहीं कर सकती। साथ ही कोर्ट ने रेखांकित किया, 'यह बहुत अफसोसनाक है कि इधर एक रुझान चल निकला है जिसमें जांच अधिकारी अपने फर्ज और जिम्मेदारियों को पूरी तरह धता बताते हुए बलात्कार की शिकायत करने वाली लड़की के इशारे पर नाचते हैं।'
अडिशनल सेशन जज वीरेन्दर भट ने कहा, 'यह उपयुक्त मामला है जहां भारतीय दंड संहिता की धारा 193, 196 (किसी न्यायिक कार्यवाही में झूठा बयान देना) के तहत दंडनीय अपराध करने के लिए आरोप लगाने वाली लड़की के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए।
अदालत ने आदेश दिया कि उसके फैसले की प्रतियां दिल्ली पुलिस कमिश्नर और अन्य को भेजी जाए ताकि लड़की के बयान को अकाट्य सत्य करार दिए बगैर खुले दिमाग से ऐसे मामलों की जांच करने के लिए पुलिस अधिकारियों को संवेदनशील बनाने और प्रशिक्षित करने की दिशा में प्रयास किए जाएं।
अदालत ने कहा कि वह आरोपियों की खोई हुई इज्जत बहाल नहीं कर सकती। साथ ही कोर्ट ने रेखांकित किया, 'यह बहुत अफसोसनाक है कि इधर एक रुझान चल निकला है जिसमें जांच अधिकारी अपने फर्ज और जिम्मेदारियों को पूरी तरह धता बताते हुए बलात्कार की शिकायत करने वाली लड़की के इशारे पर नाचते हैं।'
अडिशनल सेशन जज वीरेन्दर भट ने कहा, 'यह उपयुक्त मामला है जहां भारतीय दंड संहिता की धारा 193, 196 (किसी न्यायिक कार्यवाही में झूठा बयान देना) के तहत दंडनीय अपराध करने के लिए आरोप लगाने वाली लड़की के खिलाफ कार्यवाही होनी चाहिए।
अदालत ने आदेश दिया कि उसके फैसले की प्रतियां दिल्ली पुलिस कमिश्नर और अन्य को भेजी जाए ताकि लड़की के बयान को अकाट्य सत्य करार दिए बगैर खुले दिमाग से ऐसे मामलों की जांच करने के लिए पुलिस अधिकारियों को संवेदनशील बनाने और प्रशिक्षित करने की दिशा में प्रयास किए जाएं।
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