Saturday, 1 June 2013

शिक्षा में Quantity नहीं Quality की चिंता करें

लातूर। राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि हमें शिक्षा में क्वांटिटी नहीं बल्कि क्वालिटी की चिंता करनी चाहिए। शिक्षा में यदि भारतीय जीवन मूल्यों की सुरक्षा हुई होती तो आज महिलाओं के खिलाफ अपराध रोकने के लिए कठोर कानून बनाने की जरूरत ही नहीं पड़ती।
राष्ट्रपति ने यहां दयानंद शिक्षा समाज की स्वर्ण जयंती के समापन समारोह में कहा कि अब लोग फिर से इस बारे में बातें कर रहे हैं। अगर हमने अपनी सभ्यता की संपत्ति ‘महिलाओं के लिए सम्मान, बच्चों की देखभाल, बुजुर्गों के लिए सम्मान और सर्वसमाज के लिए सहिष्णुता’ नहीं भूले होते तो ये कभी नहीं होती। ये मूल्य हमारी प्राचीन सभ्यता से आते हैं। ये मूल हैं जिन्हें युवा छात्रों के मन में शुरू से पैदा करने की जरूरत है। अगर हमारे पास मूल्य होंगे तो हमें इन सामाजिक बुराइयों से निबटने के लिए कठोर या कठोरतम कानून के बारे में चिंता करने की जरूरत नहीं होगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा महिला सशक्तिकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
राष्ट्रपति ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए देश की शिक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण सुधार करने की जरूरत पर बल दिया। मैंने इससे पहले भी अपनी निराशा साझा की है-विश्व के शीर्ष 200 विश्वविद्यालयों में केवल एक भारतीय विश्वविद्यालय है। राष्ट्रपति ने कहा कि देश में डिग्री देने वाले 650 से अधिक संस्थान और 33 हजार से अधिक कालेज हैं लेकिन हमारे यहां अच्छे गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक संस्थानों की कमी है जिसके कारण कई अच्छे छात्र उच्च शिक्षा के लिए विदेश जाना पसंद करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत में प्राचीन समय में नालंदा और तक्षशिला जैसे कई प्रसिद्ध विश्वविद्यालय थे। मेरा विश्वास है कि अगर हम प्रयास करेंगे, हम उन सुनहरे दिनों में वापस जा सकते हैं। मुखर्जी ने निजी क्षेत्र से शिक्षा क्षेत्र की बेहतरी और नूतनता के लिए निवेश करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षा क्षेत्र में बड़ा निवेश कर रही है। सरकार ने 12वीं पंचवर्षीय योजना में शिक्षा के विस्तार के लिए जीडीपी का छह प्रतिशत निर्धारित किया है।
राष्ट्रपति ने कहा कि देश के उच्च शिक्षा क्षेत्र में काफी विस्तार हुआ है। इस क्षेत्र में नामांकित कुल छात्रों की संख्या 11वीं योजना की समाप्ति के समय 2.6 करोड़ थी जो 12वीं योजना में बढ़ने की संभावना है।
मुखर्जी ने कहा कि भारत को अच्छी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक पहुंच प्रदान करने और इसे वहन योग्य बनाने के लिए मेहनत करने की जरूरत है। महाराष्ट्र के दो दिवसीय दौरे पर आए और कल मुंबई तथा पुणे का दौरा करने वाले मुखर्जी लातूर पहुंचे जो राज्य में शिक्षा के महत्वपूर्ण केन्द्र के तौर पर उभरा है। वर्ष 1962 में स्थापित दयानंद सोसायटी के शिक्षण संस्थानों में करीब 10 हजार छात्र पढ़ते हैं।

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