भिलाई। मिसेस इंटरनेशनल श्वेता पड्डा ने लड़कियों से कहा है कि उन्हें रचनात्मक सोच के साथ आगे बढ़ना चाहिए और आसमान छूने की कोशिश करनी चाहिए। हताशा और निराशा को अपने पास भी नहीं फटकने देने वाली श्वेता पड्डा को हाल ही में गोल्डन फीनिक्स अवार्ड से नवाजा गया है। महिलाओं के उत्थान की दिशा में काम करने वाली एशिया की इस शीर्ष संस्था ने 6 सितम्बर को मलेशिया के कुआलालम्पुर स्थित पैलेस आॅफ गोल्डन हॉर्सेस में यह सम्मान दिया गया। उन्हें गोल्डन फीनिक्स के शीर्ष सम्मान बेनिवोलेंस अवार्ड प्रदान किया गया।
संडे कैम्पस से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की किसी महिला को एशिया का यह शीर्ष सम्मान पहली बार दिया गया है। शरण वेलफेयर एंड एजुकेशनल सोसायटी की संचालक श्वेता नेत्रदान अभियान की ब्रांड अम्बेसेडर भी हैं। उन्होंने वर्ल्ड विजन आर्गनाइजेशन से एक बच्ची गोद ली है तथा मधुमेह पीड़ित बच्चों को स्पांसर करती हैं।
श्वेता बताती हैं कि उनकी इस सफलता का मूल कारण उनकी सोच है। उन्होंने बतौर स्त्री, स्वयं को कभी हेय नहीं समझा। हमेशा पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चुनौतियों को स्वीकार किया। अपनी बात को साफ-साफ रखना, अपनी क्षमता अनुसार जरूरतमंदों की मदद करने की प्रवृत्ति उन्हें परिवार से विरासत में मिली। वे कहती हैं कि अपने बच्चों की काउंसिलिंग के लिए आज भी वे अपने माता-पिता की मदद लेती हैं। उन्होंने ऐसे सेशन्स का वीडियो भी बना रखा है। वे कहती हैं कि उनके व्यक्तित्व पर पिता अशोक कुमार तलवार तथा महर्षि विद्या मंदिर की प्राचार्य श्रीमती उषा तलवार का गहरा प्रभाव है।
मोदी की जबरदस्त फैन : श्वेता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जबरदस्त फैन हैं। वे कहती हैं कि मोदी में जबरदस्त कांफिडेंस है। वे कड़ी मेहनत करते हैं और फोकस्ड हैं। ये सभी गुण खुद उनमें विद्यमान हैं। वे जो भी चाहती हैं, पूरी शिद्दत से उसे पाने में जुट जाती हैं। उन्होंने बताया कि स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन, अध्ययनशील दिमाग - सब मिलकर आपको कांफिडेंस देते हैं। लक्ष्य की तरफ पूरी एकाग्रता से बढ़ने वालों की कभी हार नहीं होती। वे बताती हैं कि उन्होंने अपने अंदर कभी हीन भावना, निराशा या हताशा को प्रवेश करने नहीं दिया।
जीरो फिगर की कोई डिमांड नहीं : श्वेता कहती हैं जीरो फिगर सिर्फ एक हव्वा है। यदि जीरो फिगर के चक्कर में आपने खाना-पीना छोड़ दिया है और हमेशा बुझी बुझी सी रहती हैं तो आपका यह फिगर किस काम का। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक शिगूफा है। यह न तो फैशन इंडस्ट्री की डिमांड है और न ही शो बिजनेस की। इन क्षेत्रों में काम करने के लिए भरपूर ऊर्जा और स्ट्रेंथ की जरूरत पड़ती है। वे अच्छा भोजन लेती हैं। स्लिम ट्रिम रहने के लिए प्रतिदिन वर्कआउट करती हैं। इसके लिए वे गोल्ड जिम के वर्कआउट स्पेशलिस्ट्स का धन्यवाद भी करती हैं।
करियर के लिए शादी टालना जरूरी नहीं : श्वेता कहती हैं कि यदि परिवार सपोर्टिंग हो तो करियर के लिए शादी टालना कतई जरूरी नहीं। खुद उनका विवाह 20 साल की उम्र में हुआ। दो बच्चे हैं जो बिशप कॉटन स्कूल के बोर्डिंग में रहते हैं। उनके घर में कोई कामवाली बाई नहीं है। सारा काम वे खुद ही करती हैं। अपने फार्महाउस के 120 लोग उनके विशाल परिवार का हिस्सा हैं।
सफलता के टिप्स : श्वेता कहती हैं कि अपने ऊपर भरोसा रखें। चाल-ढाल, उठने बैठने, भाव भंगिमा में आत्मविश्वास झलकनी चाहिए। आप जो हैं- जैसी हैं, उसपर गर्व करें। जो आप नहीं हैं, वह दिखाने की कोशिश न करें। प्रत्येक घटना या व्यक्ति का सकारात्मक विवेचन करें, जीवन में जो कुछ होता है उसे सहजता के साथ स्वीकार करने की कोशिश करें। अनुशासित रहें, समय की पाबंद रहें - सफलता आपके कदम चूमेगी।
संडे कैम्पस से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की किसी महिला को एशिया का यह शीर्ष सम्मान पहली बार दिया गया है। शरण वेलफेयर एंड एजुकेशनल सोसायटी की संचालक श्वेता नेत्रदान अभियान की ब्रांड अम्बेसेडर भी हैं। उन्होंने वर्ल्ड विजन आर्गनाइजेशन से एक बच्ची गोद ली है तथा मधुमेह पीड़ित बच्चों को स्पांसर करती हैं।
श्वेता बताती हैं कि उनकी इस सफलता का मूल कारण उनकी सोच है। उन्होंने बतौर स्त्री, स्वयं को कभी हेय नहीं समझा। हमेशा पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर चुनौतियों को स्वीकार किया। अपनी बात को साफ-साफ रखना, अपनी क्षमता अनुसार जरूरतमंदों की मदद करने की प्रवृत्ति उन्हें परिवार से विरासत में मिली। वे कहती हैं कि अपने बच्चों की काउंसिलिंग के लिए आज भी वे अपने माता-पिता की मदद लेती हैं। उन्होंने ऐसे सेशन्स का वीडियो भी बना रखा है। वे कहती हैं कि उनके व्यक्तित्व पर पिता अशोक कुमार तलवार तथा महर्षि विद्या मंदिर की प्राचार्य श्रीमती उषा तलवार का गहरा प्रभाव है।
मोदी की जबरदस्त फैन : श्वेता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की जबरदस्त फैन हैं। वे कहती हैं कि मोदी में जबरदस्त कांफिडेंस है। वे कड़ी मेहनत करते हैं और फोकस्ड हैं। ये सभी गुण खुद उनमें विद्यमान हैं। वे जो भी चाहती हैं, पूरी शिद्दत से उसे पाने में जुट जाती हैं। उन्होंने बताया कि स्वस्थ शरीर, स्वस्थ मन, अध्ययनशील दिमाग - सब मिलकर आपको कांफिडेंस देते हैं। लक्ष्य की तरफ पूरी एकाग्रता से बढ़ने वालों की कभी हार नहीं होती। वे बताती हैं कि उन्होंने अपने अंदर कभी हीन भावना, निराशा या हताशा को प्रवेश करने नहीं दिया।
जीरो फिगर की कोई डिमांड नहीं : श्वेता कहती हैं जीरो फिगर सिर्फ एक हव्वा है। यदि जीरो फिगर के चक्कर में आपने खाना-पीना छोड़ दिया है और हमेशा बुझी बुझी सी रहती हैं तो आपका यह फिगर किस काम का। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ एक शिगूफा है। यह न तो फैशन इंडस्ट्री की डिमांड है और न ही शो बिजनेस की। इन क्षेत्रों में काम करने के लिए भरपूर ऊर्जा और स्ट्रेंथ की जरूरत पड़ती है। वे अच्छा भोजन लेती हैं। स्लिम ट्रिम रहने के लिए प्रतिदिन वर्कआउट करती हैं। इसके लिए वे गोल्ड जिम के वर्कआउट स्पेशलिस्ट्स का धन्यवाद भी करती हैं।
करियर के लिए शादी टालना जरूरी नहीं : श्वेता कहती हैं कि यदि परिवार सपोर्टिंग हो तो करियर के लिए शादी टालना कतई जरूरी नहीं। खुद उनका विवाह 20 साल की उम्र में हुआ। दो बच्चे हैं जो बिशप कॉटन स्कूल के बोर्डिंग में रहते हैं। उनके घर में कोई कामवाली बाई नहीं है। सारा काम वे खुद ही करती हैं। अपने फार्महाउस के 120 लोग उनके विशाल परिवार का हिस्सा हैं।
सफलता के टिप्स : श्वेता कहती हैं कि अपने ऊपर भरोसा रखें। चाल-ढाल, उठने बैठने, भाव भंगिमा में आत्मविश्वास झलकनी चाहिए। आप जो हैं- जैसी हैं, उसपर गर्व करें। जो आप नहीं हैं, वह दिखाने की कोशिश न करें। प्रत्येक घटना या व्यक्ति का सकारात्मक विवेचन करें, जीवन में जो कुछ होता है उसे सहजता के साथ स्वीकार करने की कोशिश करें। अनुशासित रहें, समय की पाबंद रहें - सफलता आपके कदम चूमेगी।


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